कामदुधा रस(मौक्तिक युक्त) के लाभ- मुख्य घटक और उपयोग विधि

By | August 23, 2018

कामदुधा रस पूर्ण रूप से एक आयुर्वेदिक औषधि है | जिसका मुख्य रूप से प्रयोग शरीर से पित्त की अधिकता दूर करने के लिए किया जाता है | दो प्रकार के कामदूधा रस आपको बाजार में उपलब्ध मिलेंगे जिसमें एक कामदुधा रस साधारण और दूसरा कामदुधा रस मोती युक्त मिलेगा | मोती युक्त कामदुधा रस(Kamdudha Ras in Hindi) साधारण कामदुधा रस की तुलना में अधिक कीमत में प्राप्त होता है | इसकी कीमत अधिक होने का कारण इसमें प्रमुख घटक मोती पिष्टी है |

Kamdudha Ras in Hindi

कामदुधा रस मौक्तिक युक्त : –

यह रसायन सौम्य होने से चंचल चित्त, चिंता फिक्र करने वाले , गर्भवती स्त्रियों और बच्चों के लिए अच्छा उपयोगी है | सौम्य होने के कारण इस दवा से कभी गर्मी बढ़ने की सम्भावना नहीं रहती | यह रसायन शीतवीर्य प्रधान है | अतएव इसका असर रक्तवाहिनी और वातवाहिनी नाडी तथा मूत्राशय पर विशेष होता है | अर्थात पित्त की वृद्धि से रक्त में गर्मी आकर रक्त की गति में वृद्धि हो जाती है, जिससे रक्त का संचार बहुत तेजी से होने लगता है | इस तरह से वात की वृद्धि होकर शरीर में अनेक तरह के उपद्र्व्य उत्पन्न हो जाते है |

मूत्राशय में भी पित्त की तेजी के कारण मूत्रकच्छादि रोग उत्पन्न हो जाते है | इसी अवस्था में इन अवयवों में बहुत जलन होती है | इस जलन और उपद्रव को दूर करने के लिए कामदुधा रस मौक्तिक युक्त(Kamdudha Ras in Hindi) रसायन का प्रयोग किया जाता है |

kamdudha ras in hindi

कामदूधा रस मौक्तिक युक्त इन रोगों में लाभ प्रदान करता है : –

  • इस रसायन का प्रयोग पित्त विकार, अम्लपित जैसे रोगों में बहुत अधिक किया जाता है | इसके परिणाम भी 100% प्राप्त होते है |
  • दिमाग की कमजोरी की अवस्था में भी इस रसायन का प्रयोग किया जाता है |
  • मूत्र विकार संबंधी रोगों में भी इसके प्रयोग से लाभ मिलता है |
  • मुहँ आना
  • बवासीर में खून गिरना
  • चक्कर आना
  • काली खांसी
  • क्षय रोग, दमा रोग
  • दाह और जीर्णज्वर
  • उन्माद, अपस्मार

उपरोक्त सभी विकारों में चिकित्सक अलग-अलग औषधियों के साथ इस रसायन के सेवन की सलाह देते है | विशेष रूप से सभी प्रकार के पित्त विकारों में यह रसायन पूर्ण रूप से लाभ पहुँचाता है | इसके अतिरिक्त मस्तिष्क विकार, आमाशय की निर्बलता, तथा सामान्य रक्तस्त्राव जैसे :- गर्मी की वजह से नाक फूटना, मुहँ से रक्त आना, आदि रक्त पित्तजन्य दोषों की शांति के लिए भी इस रसायन का प्रयोग किया जा सकता है |

Kamdudha Ras in Hindi – Main Ingredients  

कामदुधा रस (मौक्तिक युक्त) – मुख्य घटक : –

मोती पिष्टी, प्रवाल पिष्टी, मुक्ताशुक्ति पिष्टी, कौड़ी भस्म, शंख भस्म, सोना-गेरू और गिलोय सत्व |

कामदुधा रस मौक्तिक युक्त के विभिन्न रोगों में उपयोग : –

रक्तपित्त में : –

पित्त प्रकुपित हो जाने से रक्त भी विकृत हो जाता है | इसलिए रक्त से पित्त की अधिकता को दूर करने के लिए इस रसायन का प्रयोग इस प्रकार करना चाहिए : – कामदुधा रसा को दूर्वा स्वरस या अनार शर्बत के साथ दे | या आँवला मुरब्बा के साथ भी इस रस का सेवन किया जा सकता है |

पित्त प्रधान सिरदर्द में : –

इस अवस्था में इस रसायन का प्रयोग मख्खन या धारोष्ण दूध के साथ किया जाना चाहिए |

अम्लपित्त में : –

जब आमाशय पित्त प्रकुपित हो जाता है, तो जलन के साथ खट्टी डकारें आने लगती है और पित्त विदग्ध हो जाने से कडुवा वमन होने लगता है | ऐसी अवस्था में कामदुधा रस को सुतशेखर रस के साथ आँवले का स्वरस और घी पिलाकर देने से बढ़े हुए पित्त का शमन हो जाता है |

उन्माद रोग में : –

उन्माद रोग में पित्त की विकृति के कारण पाचन क्रिया में गड़बड़ी हो जाती है | जिससे पेट में गैस बनकर यह सीधा मस्तिष्क पर प्रभाव डालती है | जिससे उन्माद जैसा विकार उत्पन्न हो जाता है | ऐसी अवस्था में मन चंचल हो जाता है, असंतोष ह्रदय निर्बल हो जाना, जिससे बार-बार चक्कर आना, चक्कर आकार बेहोश हो जाना आदि लक्षण उपस्थित होने पर कामदुधा रस 2 रत्ती को 2 माशा ब्राह्मी चूर्ण या शंख पुष्पी चूर्ण में मिलाकर मिश्री के साथ देना चाहिए और सिर श्रीगोपाल तेल, महाचंदनआदि तेल, हिमसागर तेल आदि किसी एक तेल द्वारा मालिश करानी चाहिए |

सम्बंधित जानकारियाँ :-

कामदुधा रस एक बहुत ही प्रभावी आयुर्वेदिक औषधि है जिसका प्रयोग आयुर्वेद में बहुत अधिक किया जाता है | खासतौर से महाराष्ट्र और मध्यप्रदेश के चिकित्सक इस औषधि(Kamdudha Ras in Hindi) का प्रयोग बहुत अधिक करते है |

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